Friday, November 9, 2018

सीनियर स्टाफ को 3-5% सैलरी हाइक देगी इन्फोसिस

सूत्रों के मुताबिक, असोसिएट वाइस प्रेजिडेंट्स (AVPs) , वाइस प्रेजिडेंट्स (VPs), सीनियर वाइस प्रेजिडेंट्स (SVPs) और एग्जिक्युटिव वाइस प्रेजिडेंट्स (EVPs) के सैलरी इन्क्रिमेंट्स के लिए बातचीत हो रही है और बजट भी फाइनल किया जा रहा है।

शिल्पा फडनीस, बेंगलुरु
इन्फोसिस जनवरी महीने में अपने सीनियर लेवल एग्जिक्युटिव्स की सैलरी बढ़ा सकती है। कंपनी में डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट्स के तहत नियुक्त स्टाफ के लिए परफॉर्मेंस इंसेटिव्स पर ज्यादा जोर दिए जाने की भी उम्मीद है। इन्फोसिस के ज्यादातर एंप्लॉयीज को अप्रैल महीने में इन्क्रिमेंट्स मिल गए थे। हालांकि, सीनियर लेवल के एंप्लॉयीज को जुलाई महीने से इन्क्रिमेंट्स मिलने थे, जो नहीं मिले।

सूत्रों के मुताबिक, असोसिएट वाइस प्रेजिडेंट्स (AVPs) , वाइस प्रेजिडेंट्स (VPs), सीनियर वाइस प्रेजिडेंट्स (SVPs) और एग्जिक्युटिव वाइस प्रेजिडेंट्स (EVPs) के सैलरी इन्क्रिमेंट्स के लिए बातचीत हो रही है और बजट भी फाइनल किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस रैंक में कुल 500 स्टाफ हैं।

सूत्र बताते हैं कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी इन्हें 3 से 5 प्रतिशत तक की हाइक दी जाएगी। करीब 100 से 150 एग्जिक्युटिव्स को प्रमोशन दिए जाने की भी उम्मीद है। आईटी इंडस्ट्री में नई डिजिटल टेक्नॉलजी के आगमन और बिजनस मॉडल में बदलाव के बाद सीनियर लेवल कंपेनसेशन पर करीबी नजर रखी जा रही है। इस वजह से परफॉर्मेंस आधारित इंसेंटिव्स पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।

पहले शीर्ष अधिकारियों को रेवेन्यू और ऑपरेटिंग मार्जिन के पारंपरिक आधार पर कंपेनसेशन दिया जाता था, लेकिन अब इन्फोसिस ने इसे डिजिटल परफॉर्मेंस से जोड़ दिया। अनुमान जाताया जा रहा है कि यही पद्धति सेल्स और डिलिवरी से जुड़े निचले स्तर के अधिकारियों के साथ भी लागू होगी जिनके लिए हर वर्ष 15 से 30 करोड़ डॉलर का रेवेन्यू जुटाने का टारगेट होता है।

सामाजिक कार्यकर्ता वेंकटेश नायक के आरटीआई इंटरवेंशन ऐंड रिसर्च ने बताया है कि 2012 से 2018 के बीच बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात में 24,570 इंडियन वर्कर्स की मौत हुई है। सबसे ज्यादा 10,416 मौतें सऊदी अरब में हुई हैं जबकि इस लिस्ट में 1,317 के साथ सबसे नीचे बहरीन रहा है। साल के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा मौतें 2015 में हुईं, जब 4,702 वर्कर्स की जान गई, 2012 में सबसे कम 2,375 का आंकड़ा रहा।

खाड़ी देशों के सभी भारतीय दूतावास आरटीआई के तहत मौतों से जुड़े डेटा मुहैया कराने में तत्पर नहीं नजर आए। कुवैत, बहरीन, ओमान कतर और सऊदी अरब ने डेटा मुहैया कराए हैं, जबकि UAE ने सेक्शन 8(1)J का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया। इस सेक्शन के तहत निजी सूचना नहीं जारी करने की छूट होती है। सिर्फ कतर के भारतीय दूतावास ने मौतों की वजह के बारे में भी बताया। इस खाड़ी देश में हुई 80% मौतों की वजह प्राकृतिक रहीं जबकि 14% मामले एक्सीडेंट और 6% खुदकुशी के रहे।

दुनियाभर में काम कर रहे भारतीयों ने 2012 से 2017 के बीच जितनी रकम भारत भेजी, उनमें आधे से ज्यादा का योगदान खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों का था। इस दौरान ग्लोबल रेमिटेंस कुल $410.33 अरब रहा जबकि खाड़ी देशों में काम करने वाले इंडियन वर्कर्स का हिस्सा $209.07 अरब रहा। वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक, खाड़ी देशों में यूएई से सबसे ज्यादा $72.30 अरब की रकम इंडिया भेजी गई, जबकि सऊदी अरब $62.60 अरब के साथ दूसरे नंबर पर रहा। लिस्ट में इनके बाद कुवैत ($25.77 अरब); कतर ($22.57 अरब); ओमान ($18.63 अरब) और बहरीन $7.19 अरब रहा।

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