Monday, February 18, 2019

पुलवामा हमले के विरोध में लग रहे नारों में गालियां देने वाले लोग कौन हैं?

भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में हुए चरमपंथी हमले को चार दिन बीत गए हैं. मौजूदा केंद्र सरकार के शासनकाल में यह अब तक का सबसे बड़ा चरमपंथी हमला है, जिसमें सीआरपीएफ़ के 40 जवान मारे गए.

हमले के बाद से देश भर में लगातार विरोध प्रदर्शन हुए हैं. लोग पाकिस्तान से इसका बदला लेने की मांग करते हुए सड़कों पर उतर रहे हैं. कैंडल मार्च निकालकर मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि दी जा रही है.

बिहार की राजधानी पटना के कारगिल चौक पर पिछले चार दिनों से रोज़ प्रदर्शन और कैंडिल मार्च निकाले गए हैं. चौक का गोलंबर बैनरों और पोस्टरों से पटा है. कुछ में संगठन या संस्था का नाम लिखा हुआ है तो कोई बैनर बिना किसी नाम का है. लेकिन, हर दूसरे बैनर में जवानों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ हमले का बदला लेने की बात भी लिखी गई है.

रविवार की शाम को भी कारगिल चौक पर एक प्रदर्शन हुआ था. जिसमें एक युवक के साथ मारपीट की ख़बर आई थी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ मारपीट की नौबत इसलिए आई क्योंकि वह युवक प्रदर्शन में शामिल लोगों को इस बात के लिए मना कर रहा था कि वे अश्लील और गाली देते हुए नारे नहीं लगाएं.

प्रदर्शन के समय के कुछ विजुअल्स में साफ़ दिख रहा है कि लोग केवल नारों में ही गाली का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे, बल्कि अपने साथ तख्तियों और पोस्टरों पर भी पाकिस्तान के नाम के साथ गाली और अश्लील शब्द लिख कर लाए थे.

हालांकि, युवक को वहां मौजूद दूसरे प्रदर्शनकारियों ने भीड़ के हाथों पिटने से बचा लिया और फिर पुलिस के हस्तक्षेप के बाद उसे वहां से किसी तरह हटा लिया गया. गांधी मैदान थाने में इसकी शिकायत भी दर्ज कराई गई है. पुलिस ने कुछ युवकों को हिरासत में लिया फिर पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया.

इतने बड़े चरमपंथी हमले के कारण लोगों के अंदर आक्रोश है. मारे गए जवानों के लिए गहरी संवेदना भी है. मगर, ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि विरोध प्रदर्शन में गालियों वाले नारे और अश्लील शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है.

आख़िर वे कौन लोग हैं जो इस तरह से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं? और उनमें किस क़दर ग़ुस्सा है जो वे भीड़ में भी चिल्ला-चिल्ला कर गालियां देने से नहीं हिचक रहे हैं? क्या उन्हें प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की भावना का भी ख़्याल नहीं है?

इन्हीं सवालों के साथ सोमवार की दोपहर को हम मौजूद थे कारगिल चौक पर. पुलिस को यह ख़बर लग गई थी कि एक जत्था विरोध प्रदर्शन के लिए थोड़ी देर में वहां पहुंचने वाला है. इसलिए ऐहतियातन रैपिड एक्शन फ़ोर्स और बिहार पुलिस बल के अतिरिक्त जवान बुला लिए गए थे.

कारगिल चौक पर ही स्थित सदर प्रखंड कार्यालय, पटना के मेन गेट के पास चाय और पान-गुटखा बेच रहे दो दुकानदारों की आपस में बातचीत चल रही थी. दोनों यह बात कर रहे थे कि पिछले दो-तीन दिनों से वहां ख़ूब जमावड़ा लगा है. उनकी बिक्री भी बढ़ी है.

तभी दाहिनी ओर अशोक राजपथ से होता हुआ एक जत्था कारगिल चौक के पास पहुंचता है. पाकिस्तान मुर्दाबाद और पाकिस्तान होश में आओ के नारे लग रहे थे. जत्थे में तीन-चार युवतियां भी शामिल थीं. सबके हाथों में तिरंगा झंडा और तख्तियां थीं.

उन्हें आता देख चायवाले ने पानवाले दुकानदार से हंसते हुए कहा, "सोच रहा हूं कि तिरंगा झंडा छापने वाला मशीन ही ले लूं, कमाकर राजा बन जाऊंगा".

इस पर दूसरे दुकानदार ने पूछा कैसे? चायवाले ने जवाब दिया, "देख रहे हो सबके हाथों में झंडा है. पिछले तीन-चार दिन में नहीं भी तो हज़ारों झंडे आए होंगे. सब तरफ़ लोग झंडा लेकर ही निकल रहे हैं. ऐसे में धंधा ख़राब नहीं है." फिर दोनों हंसने लगे.

कारगिल चौक पर थोड़ी देर के लिए ट्रैफ़िक रुक गया था. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए लोगों ने गोलंबर के दो राउंड लगाए. थोड़ी देर के लिए ठहरे. किसी ने सेल्फी ली, किसी ने फेसबुक लाइव किया और फिर सबने प्रदर्शन करते हुए ग्रुप फ़ोटो खिंचवायी.

हमने बात करनी चाही तो सब एक सुर में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ बोलने लगे. उसी में युवक काफ़ी ज़ोर से "पाकिस्तान होश में आओ" के नारे लगा रहा था.

हमने सवाल किया कि पाकिस्तान कैसे होश में आएगा? उसने कहा, "भारत सरकार को लाना होगा. जिस तरीक़े से पाकिस्तानियों ने हमारे जवानों को मारा हमें भी पाकिस्तान में घुसकर मारना चाहिए. उन्होंने हमारे चालीस जवानों का मारा, हमें उनके चार सौ जवानों को मारना होगा. तब पाकिस्तान होश में आएगा."

कुछ देर रुककर नारेबाज़ी करने के बाद वे लोग चले गए. लेकिन हमें इस प्रदर्शन के दौरान एक भी बार गाली या फिर अश्लील शब्द सुनने को नहीं मिले थे. हालांकि, लोगों के अंदर नफ़रत का भाव ज़रूर दिख रहा था. जब वो बार-बार बदला लेने की बात कर रहे थे.

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